Thursday, 11 March 2010

कुछ देर हुई , एक युद्ध हुआ

कुछ देर हुई एक युद्ध हुआ
धुन्धला धुन्धला परिणाम रहा
एक और जुता था अर्ध प्रेम
एक और पूर्ण अभिमान रहा

मेरा सब कुछ था दाव लगा
हारूं जीतूँ का प्रश्न कहाँ
हारूं तो प्रेम विहीन जियूं
जीतूँ तो प्रेम विभीस्त सहूँ

सम्मान की आहत अभिलाषा
कल आशा से बढ़कर पूर्ण हुई
पर जब बदली उसने परिभाषा
कारण विनाश का मूल बनी

संध्या के इस अंधियारे में
पहचान सकेगा कौन भला
कोमल सहमा सा ये चेहरा
तुम हो, या है प्रतिबिम्ब मेरा

कुछ देर हुई एक युद्ध हुआ
धुन्धला धुन्धला जिसका परिणाम
वो सूर्य क्षितिज पर ठहरा है
या रक्त रंजित एक पूर्ण विराम

6 comments:

Anonymous said...

ardh prem aur poorn abhiman...achcha likha hai

Anonymous said...

http://views24hours.com/news.php?id=616&mid=17&sid=61


कुछ देर हुई , एक युद्ध हुआ

views24hours said...

http://views24hours.com/news.php?id=616&mid=17&sid=61


कुछ देर हुई , एक युद्ध हुआ

Dr.J.P.Tiwari said...

saargarbhit aur maarmik abhivyakti hai. bhawnaayen sukomal aur samarpit hai saath hi anjaani bhay se aahat bhi. kyaa karogi yahi sachchhai hai ,ahi jeewan hai aur uska yatharth bhi . sunder atisunder

दिलीप said...

bahut din baad achha kavya padh raha hun...jisme ek lay hai...wah...

http://dilkikalam-dileep.blogspot.com/

SANJAY said...

KUCH UJALE HAI JO APKO DEKHNE HAI,KUCH YADEIN HAI JO APKO SAHEJANI HAI,DER BAHUT HUYI HAI PER ITANI NAHI KI APP USKO PAA NA SAKO,WO JAHA BHI HAI PER APKE KAREEB HAI,JO ABHI HAI WO NASIB HAI.
KEEP IT UP-BEST OF LUCK